(N/A) नाभिकीय रिएक्टर एक ऐसा उपकरण है जिसमें नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction) को शुरू किया जाता है,बनाए रखा जाता है और नियंत्रित किया जाता है।
सिद्धांत: यह नियंत्रित नाभिकीय विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया के सिद्धांत पर कार्य करता है,जिसमें ऊर्जा एक स्थिर और नियंत्रित दर पर मुक्त होती है।
बनावट:
$1$. कोर (Core): रिएक्टर का केंद्रीय भाग जिसमें ईंधन के रूप में समृद्ध यूरेनियम $({ }_{92}^{235} U)$ होता है।
$2$. ईंधन: ${ }_{92}^{235} U$,${ }_{92}^{238} U$ या ${ }_{94}^{239} Pu$ जैसे विखंडनीय पदार्थों का उपयोग किया जाता है। ईंधन को एल्युमिनियम या स्टेनलेस स्टील की छड़ों में रखा जाता है।
$3$. मंदक (Moderator): भारी जल $(D_2O)$,ग्रेफाइट या बेरिलियम ऑक्साइड जैसे पदार्थों का उपयोग तेज न्यूट्रॉन को धीमा करके तापीय ऊर्जा तक लाने के लिए किया जाता है।
$4$. नियंत्रक छड़ें (Control Rods): कैडमियम या बोरॉन जैसे न्यूट्रॉन-अवशोषक पदार्थों की छड़ों का उपयोग अतिरिक्त न्यूट्रॉन को अवशोषित करके श्रृंखला अभिक्रिया की दर को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
$5$. परावर्तक (Reflector): न्यूट्रॉन के रिसाव को कम करने के लिए कोर के चारों ओर लगाया जाता है।
$6$. शीतलक (Coolant): पानी,भारी जल या तरल सोडियम जैसे तरल पदार्थ कोर से गुजरते हैं और विखंडन द्वारा उत्पन्न गर्मी को हटाते हैं।
$7$. परिरक्षण (Shielding): हानिकारक विकिरणों को बाहर आने से रोकने के लिए पूरे रिएक्टर को कंक्रीट के एक मोटे पात्र में रखा जाता है।
कार्यप्रणाली:
ईंधन के नाभिक के विखंडन से गर्मी निकलती है। शीतलक इस गर्मी को अवशोषित करता है और इसे हीट एक्सचेंजर (स्टीम जनरेटर) में स्थानांतरित करता है। हीट एक्सचेंजर इस ऊर्जा का उपयोग पानी को भाप में बदलने के लिए करता है,जो फिर टर्बाइन को चलाकर बिजली उत्पन्न करती है। बिजली उत्पादन को स्थिर रखने के लिए नियंत्रक छड़ों को अंदर या बाहर किया जाता है।